Geeta Saar In Hindi

Geeta Saar In Hindi | Iskconkart

श्रीमद्भगवद्गीता विश्व के सबसे प्राचीन और दिव्य ग्रंथों में से एक है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र के युद्धभूमि में जीवन के सबसे गूढ़ रहस्यों का उपदेश दिया। यह केवल एक धर्मग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की सम्पूर्ण कला है। आज हम आपके लिए लाए हैं गीता सार — भगवद्गीता के सार को सरल और प्रभावशाली शब्दों में, जो हर पाठक के मन और आत्मा को छू जाएगा।

Geeta Saar In Hindi

गीता सार

कर्म कर फल की चिंता मत कर,
कर्म ही पूजा है, कर्म ही धर्म।
मैं तेरे कर्मों का फल दूंगा,
तू कर्म कर, बस कर्म कर।

मन को साध, इन्द्रियों को जीत,
यही है सच्चा योगी की रीत।
सुख-दुःख में जो सम रहे,
वही पुरुष है ज्ञानी कहे।

जो जन्मा है वह मरेगा एक दिन,
यह शरीर नाशवान, आत्मा अमर।
शोक मत कर इस नाशवान देह का,
आत्मा न जन्मे, न मरे कभी।

जैसे पुराने वस्त्र त्याग दिए जाते हैं,
वैसे ही आत्मा शरीर त्याग देती है।
नया शरीर धारण करती है फिर से,
यह चक्र चलता रहता है सदा।

जो भी हुआ अच्छे के लिए हुआ,
जो हो रहा है वह भी अच्छे के लिए है।
जो होगा वह भी अच्छा ही होगा,
तू व्यर्थ चिंता क्यों करता है?

तूने क्या खोया, जो रोता है?
तू क्या लाया था, जो खो गया?
तूने क्या उत्पन्न किया, जो नष्ट हो गया?
जो लिया यहीं से, दिया यहीं को।

जो तेरा था, आज किसी और का है,
कल किसी और का हो जाएगा।
परिवर्तन संसार का नियम है,
इसे ही तू सत्य मान।

खाली हाथ आया था तू,
खाली हाथ ही जाएगा।
जो आज तेरा है, कल किसी और का था,
परसों किसी और का हो जाएगा।

तू ही भूल कर रहा है इसको अपना मान,
इसी भूल से तू दुखी है इंसान।
मन से जब अपनापन हटाएगा,
तू ही ईश्वर को पाएगा।

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यदि आप भगवद्गीता के गहन ज्ञान को अपने जीवन में और भी गहराई से उतारना चाहते हैं, तो ISKCON Kart आपके लिए लाया है श्रील प्रभुपाद द्वारा रचित भगवद्गीता यथारूप सहित अनेक दिव्य पुस्तकें, जप माला, भगवान की मूर्तियां, और आध्यात्मिक उपहार सामग्री — सब एक ही स्थान पर।

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निष्कर्ष

गीता सार हमें यह सिखाता है कि जीवन में कर्म करना ही हमारा धर्म है, फल की चिंता करना नहीं। यह शरीर नाशवान है परंतु आत्मा अमर है — इस सत्य को समझ लेने से ही मनुष्य सभी दुखों से मुक्त हो जाता है। भगवद्गीता का यह सार हमें मोह-माया से ऊपर उठकर जीवन को सहजता और शांति से जीने की प्रेरणा देता है। आइए, इस दिव्य ज्ञान को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं और श्रीकृष्ण के बताए मार्ग पर चलें।

हरे कृष्ण!

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